वेज़ एंड मीन्स एडवांस (WMA) भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) द्वारा केंद्र और राज्य सरकारों को प्रदान की जाने वाली एक अल्पकालिक (short-term) ऋण सुविधा (loan facility) है। इसका उद्देश्य सरकारों की प्राप्तियों (receipts) और भुगतानों (payments) के बीच अस्थायी असंतुलन (temporary mismatch) को पूरा करना है। इसे धारा 17(5) आरबीआई अधिनियम, 1934 के तहत शासित किया जाता है.
आवश्यकता (Necessity): सरकार के खर्च और राजस्व प्राप्ति (revenue receipts) में समय का अंतर हो सकता है। उदाहरण के लिए, कर संग्रह (tax collection) एक विशिष्ट अवधि में अधिक हो सकता है, जबकि सरकारी खर्च पूरे वर्ष समान रूप से फैले हो सकते हैं। WMA इस अंतर को पाटने में मदद करता है, ताकि सरकार अपने दायित्वों (obligations) को समय पर पूरा कर सके।
महत्व (Importance):
उदाहरण: मान लीजिए कि किसी राज्य सरकार को अपने कर्मचारियों को वेतन देना है, लेकिन उसके पास पर्याप्त धनराशि नहीं है क्योंकि कर संग्रह अभी तक नहीं हुआ है। ऐसे में, राज्य सरकार RBI से WMA का उपयोग करके आवश्यक धनराशि प्राप्त कर सकती है और वेतन का भुगतान समय पर कर सकती है।
WMA दो प्रकार के होते हैं:
सामान्य WMA (Normal WMA): ये बिना किसी प्रतिभूति (collateral) के प्रदान किए जाते हैं, यानी ये "क्लीन एडवांस" (clean advances) होते हैं। इनकी सीमा (limit) प्रत्येक राज्य के लिए RBI द्वारा निर्धारित की जाती है, जो उस राज्य के पिछले तीन वर्षों के औसत राजस्व और पूंजीगत व्यय (capital expenditure) पर आधारित होती है।
विशेष WMA (Special WMA) / विशेष आहरण सुविधा (Special Drawing Facility - SDF): ये भारत सरकार की दिनांकित प्रतिभूतियों (dated securities) के बदले प्रदान किए जाते हैं। राज्य सरकारें अपनी प्रतिभूतियों (जैसे कि Consolidated Sinking Fund (CSF) और Guarantee Redemption Fund (GRF) में निवेश) को गिरवी रखकर SDF का लाभ उठा सकती हैं। SDF की ब्याज दर सामान्य WMA से कम होती है (आमतौर पर रेपो रेट से 1% कम)।
जब कोई राज्य सरकार WMA और SDF दोनों सीमाओं को पार कर जाती है, तो उसे ओवरड्राफ्ट (OD) सुविधा प्रदान की जाती है। यह एक ऐसी स्थिति है जब सरकार RBI के पास अपने खाते में जमा राशि से अधिक राशि निकाल लेती है।
WMA से भिन्नता (Difference from WMA): WMA एक पूर्व-अनुमोदित (pre-approved) ऋण सुविधा है, जबकि ओवरड्राफ्ट एक अनियोजित (unplanned) स्थिति है जो तब उत्पन्न होती है जब सरकार अपनी WMA सीमा से अधिक खर्च करती है।
ओवरड्राफ्ट की शर्तें (Overdraft Conditions):
केंद्र सरकार के लिए (For Central Government): WMA की सीमा (limit) सरकार और RBI द्वारा पारस्परिक रूप से (mutually) तय की जाती है और समय-समय पर संशोधित (periodically revised) की जाती है।
राज्य सरकारों के लिए (For State Governments): RBI प्रत्येक राज्य के लिए सामान्य और विशेष WMA की सीमा निर्धारित करता है। यह सीमा उस राज्य के पिछले तीन वर्षों के औसत राजस्व और पूंजीगत व्यय पर आधारित होती है। विशेष WMA की सीमा राज्य द्वारा रखी गई केंद्र सरकार की दिनांकित प्रतिभूतियों (dated securities) पर निर्भर करती है।
हाल के बदलाव (Recent Changes): COVID-19 महामारी के प्रभाव के कारण, RBI ने राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों की WMA सीमा को बढ़ाया है। जून 2024 में, आरबीआई ने राज्यों / केंद्र शासित प्रदेशों की WMA सीमा को ₹47,010 करोड़ से बढ़ाकर ₹60,118 करोड़ कर दिया.
WMA राजकोषीय घाटे का प्रत्यक्ष (direct) स्रोत नहीं है। राजकोषीय घाटा सरकार के कुल व्यय (total expenditure) और उसके कुल राजस्व (total revenue) (उधार को छोड़कर) के बीच का अंतर होता है। WMA केवल एक अल्पकालिक व्यवस्था है जो सरकार को उसके नकदी प्रवाह (cash flow) के अस्थायी असंतुलन को प्रबंधित करने में मदद करती है। यह सरकार के लिए वित्तपोषण का स्रोत नहीं है, बल्कि केवल अस्थायी कठिनाइयों के लिए एक समर्थन है। 1997 से पहले, तदर्थ ट्रेजरी बिल (ad-hoc Treasury Bills) स्वचालित रूप से राजकोषीय घाटे का मुद्रीकरण करते थे, लेकिन WMA प्रणाली ने इसे समाप्त कर दिया।
समेकित शोधन निधि (Consolidated Sinking Fund - CSF): यह कुछ राज्य सरकारों द्वारा RBI के पास बनाए रखा जाने वाला एक आरक्षित कोष (reserve fund) है। इसका उद्देश्य राज्य सरकारों के बाजार ऋणों (market loans) के पुनर्भुगतान (redemption) के लिए धन उपलब्ध कराना है।
गारंटी विमोचन निधि (Guarantee Redemption Fund - GRF): यह भी कुछ राज्य सरकारों द्वारा बनाए रखा जाने वाला एक आरक्षित कोष है। इसका उद्देश्य राज्य सरकार द्वारा जारी गारंटियों (guarantees) को पूरा करना है, यदि गारंटी लेने वाली संस्था (entity) भुगतान करने में विफल रहती है।
SDF के सन्दर्भ में भूमिका (Role in SDF): राज्य सरकारें CSF और GRF में अपने निवेश को संपार्श्विक (collateral) के रूप में उपयोग करके RBI से विशेष आहरण सुविधा (SDF) का लाभ उठा सकती हैं।
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